अभिषेक की एक बड़ी बात ये है कि कई निम्बार्की पंचामृत ग्रहण करने तक निर्जला व्रत रखते है। बाबूजी रात में पंचामृत लेने के बाद ही कुछ भोजन करते है। अन्य लोग भी फलाहार करते है।
बुधवार, 23 नवंबर 2011
जयंती के दिन समाज गायन के कुछ दृश्य
अभिषेक की एक बड़ी बात ये है कि कई निम्बार्की पंचामृत ग्रहण करने तक निर्जला व्रत रखते है। बाबूजी रात में पंचामृत लेने के बाद ही कुछ भोजन करते है। अन्य लोग भी फलाहार करते है।
सोमवार, 21 नवंबर 2011
मंगलवार, 12 जुलाई 2011
उत्सव के कुछ दुर्लभ चित्र



यह दृश्य १९८२ में कार्तिक पूर्णिमा का है। हारमोनियम पर है मुखिया श्री रूपकिशोर दास जी। सारंगी पर श्री राम गोपाल दास जी।
यह फोटो १९८२ की है। इस साल उत्सव में निम्बार्काचार्य श्री श्रीजी महाराज आये। उनके साथ मेरी दादी यानी तब सेवायत 'श्याम प्यारी' बैठी है।
यह दृश्य भी १९८२ का है। इस साल तक रास के स्वरूपों का डोला भी लोग कन्धों पर लेकर जाते थे। इस साल के बाद ये तरीका बंद हो गया लेकिन डोला बिलकुल वैसा ही तैयार होता है। रौशनी के लिए मशालों का इस्तेमाल होता था, बाद में पेट्रोमेक्स आया। अब डोला सामान रिक्शा पर जाता है और रोशनी के लिए जेनरेटर से बिजली की झाड़ का इस्तेमाल होता है।
शनिवार, 12 फ़रवरी 2011
मंदिर की संध्या कालीन आरती की स्तुति
स्तुति
श्री हंस च सनत्कुमारप्रभ्रतीन वीणाधरम नारदं।
निम्बादित्यगुरुं च द्वादश गुरुं श्री निवासादिकान॥
वन्दे सुन्दर भट्ट देशिक मुखान्वस्विंदु संख्या युतान।
श्री व्यासाद्धरिमध्यगा च परितः सर्वान्गुरुन्सादरम॥
हे निम्बार्क दयानिधे गुणनिधे हे भक्त चिंतामने।
हे आचार्य शिरोमने मुनि गणेराम्रग्यपादाम्बुजम॥
हे सृष्टिस्थितिपालनप्रभवन हे नाथ मायाधिपे।
हे गोवर्धन कन्दरालयविभो मां पाहि सर्वेश्वर।
कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षः स्थले कौस्तुभं।
नासाग्रे वर मौक्तिकं करतले वेणु करे कंकणं॥
सर्वांगे हरीचन्दनं सुललितं कंठे च मक्तावली।
गोपस्त्रीपरिवेष्ठितो विजयते गोपालचूरामणि॥
फुल्लेंदीवर कान्ति मिंदुवदनं वर्हावतंसन प्रियं।
श्री वत्सांगमुदार कौस्तुभधरं पीताम्बर सुन्दरम॥
गोपीनां नयनोत्पलार्ची त तनुं गोगोपसंघाव्रतम।
गोविन्दं कलवेणु वादनपरं दिव्यांगभुषम भजे॥
हे राधे वृष भानु भूपतनये हे पूर्ण चंद्रानने।
हे कांते कमनीय कोकिलरवे ब्रन्दावनाधीश्वरी॥
हे मत्प्रानपरायने च रसिके हे सर्वयुथेश्वरी।
आगत्य त्वरितं प्रतप्त मणिशं मां दीनमानन्दय॥
हे राधे वृषभानुभूपतनये सर्वेश्वरी राधिके।
हे कृष्णानन पंकजभ्रमरिके कृष्ण प्रिये माधवी॥
हे वृन्दावननागरी गुणगुरो दामोदरप्रेयसी।
हे हे श्री मलललितादिक प्रियसखी प्रनाधिके पाहि माम॥
शिन्जनू पुरपादपदमयुगलामा हंसीं गतिं विभ्रतीम।
चंचतखंजनमंजुलोचनयुगां पोनोल्लसत्कंधराम॥
शोभित कांचनकंकनद्युति मिलतपानौ चलच्चामरम।
कुरवाणाम हिरराधिकोपरि सदा श्री रंगदेवीं भजे॥
श्री रंगादिसुदेविका च ललिता वैशाखिका चम्पिका।
चित्र तंग सुखिंदुलेखकपरा चाष्टो प्रधानाप्रिया॥
चान्या सन्ति प्रियात्प्रिया लघुतमानित्ये च नैमित्तके।
वन्दे त्वच चरणारविन्दनितरां दासा वयं श्रद्धया॥
स्वभावतोपास्तसमस्तदोष मशेष कल्याण गुनेकराशिम।
व्यूहांगिनं ब्रह्म परंवरेण्यम ध्यायेम कृष्णं कमलेक्षण हरिम॥
अंगे तुवामे ब्रिषभानुजा मुदाविराजमानामनुरूपसौभागाम।
सखी सह्त्रै परिसेविताम सदा स्मरेम देवीं सकलेष्टकामदाम॥
नान्यागति कृष्णपदारबिन्दात संद्रेश्यते ब्रह्मशिवादिवंदितात।
भक्तेछ्योपत्सुचिन्त्त्यविग्रहादचिन्त्यशक्तेरविचिन्त्यशासनात॥
लोकत्रये यान्यसदीहितानी तान्येव सर्वाणि मया कृतानि।
तदीय पाकावसरम विसोढुमसक्नुवन देवमुपैमी नाथ॥
वशीकृतिं यान्ति न हीन्द्रियानी बुद्धिर्नशुद्धिम समुपैति तस्मात्।
न साधनं मेस्ती तव प्रसादे दयालुभावेन बिना हरे ते॥
न धर्मनिष्ठोस्मी नचात्मवेदी न भक्तित्मा स्त्वच्चारानार्विंदे।
अकिन्चनोनन्यगति शरण्यं त्वत्पादमूलं शरणं प्रपद्ये॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
श्री हंस च सनत्कुमारप्रभ्रतीन वीणाधरम नारदं।
निम्बादित्यगुरुं च द्वादश गुरुं श्री निवासादिकान॥
वन्दे सुन्दर भट्ट देशिक मुखान्वस्विंदु संख्या युतान।
श्री व्यासाद्धरिमध्यगा च परितः सर्वान्गुरुन्सादरम॥
हे निम्बार्क दयानिधे गुणनिधे हे भक्त चिंतामने।
हे आचार्य शिरोमने मुनि गणेराम्रग्यपादाम्बुजम॥
हे सृष्टिस्थितिपालनप्रभवन हे नाथ मायाधिपे।
हे गोवर्धन कन्दरालयविभो मां पाहि सर्वेश्वर।
कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षः स्थले कौस्तुभं।
नासाग्रे वर मौक्तिकं करतले वेणु करे कंकणं॥
सर्वांगे हरीचन्दनं सुललितं कंठे च मक्तावली।
गोपस्त्रीपरिवेष्ठितो विजयते गोपालचूरामणि॥
फुल्लेंदीवर कान्ति मिंदुवदनं वर्हावतंसन प्रियं।
श्री वत्सांगमुदार कौस्तुभधरं पीताम्बर सुन्दरम॥
गोपीनां नयनोत्पलार्ची त तनुं गोगोपसंघाव्रतम।
गोविन्दं कलवेणु वादनपरं दिव्यांगभुषम भजे॥
हे राधे वृष भानु भूपतनये हे पूर्ण चंद्रानने।
हे कांते कमनीय कोकिलरवे ब्रन्दावनाधीश्वरी॥
हे मत्प्रानपरायने च रसिके हे सर्वयुथेश्वरी।
आगत्य त्वरितं प्रतप्त मणिशं मां दीनमानन्दय॥
हे राधे वृषभानुभूपतनये सर्वेश्वरी राधिके।
हे कृष्णानन पंकजभ्रमरिके कृष्ण प्रिये माधवी॥
हे वृन्दावननागरी गुणगुरो दामोदरप्रेयसी।
हे हे श्री मलललितादिक प्रियसखी प्रनाधिके पाहि माम॥
शिन्जनू पुरपादपदमयुगलामा हंसीं गतिं विभ्रतीम।
चंचतखंजनमंजुलोचनयुगां पोनोल्लसत्कंधराम॥
शोभित कांचनकंकनद्युति मिलतपानौ चलच्चामरम।
कुरवाणाम हिरराधिकोपरि सदा श्री रंगदेवीं भजे॥
श्री रंगादिसुदेविका च ललिता वैशाखिका चम्पिका।
चित्र तंग सुखिंदुलेखकपरा चाष्टो प्रधानाप्रिया॥
चान्या सन्ति प्रियात्प्रिया लघुतमानित्ये च नैमित्तके।
वन्दे त्वच चरणारविन्दनितरां दासा वयं श्रद्धया॥
स्वभावतोपास्तसमस्तदोष मशेष कल्याण गुनेकराशिम।
व्यूहांगिनं ब्रह्म परंवरेण्यम ध्यायेम कृष्णं कमलेक्षण हरिम॥
अंगे तुवामे ब्रिषभानुजा मुदाविराजमानामनुरूपसौभागाम।
सखी सह्त्रै परिसेविताम सदा स्मरेम देवीं सकलेष्टकामदाम॥
नान्यागति कृष्णपदारबिन्दात संद्रेश्यते ब्रह्मशिवादिवंदितात।
भक्तेछ्योपत्सुचिन्त्त्यविग्रहादचिन्त्यशक्तेरविचिन्त्यशासनात॥
लोकत्रये यान्यसदीहितानी तान्येव सर्वाणि मया कृतानि।
तदीय पाकावसरम विसोढुमसक्नुवन देवमुपैमी नाथ॥
वशीकृतिं यान्ति न हीन्द्रियानी बुद्धिर्नशुद्धिम समुपैति तस्मात्।
न साधनं मेस्ती तव प्रसादे दयालुभावेन बिना हरे ते॥
न धर्मनिष्ठोस्मी नचात्मवेदी न भक्तित्मा स्त्वच्चारानार्विंदे।
अकिन्चनोनन्यगति शरण्यं त्वत्पादमूलं शरणं प्रपद्ये॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
सोमवार, 13 दिसंबर 2010
श्री निम्बार्क आचार्य वृन्द जयन्ती महोत्सव में गाये जाने वाले पद
श्री निम्बार्क आचार्य वृन्द जयन्ती महोत्सव में गाये जाने वाले पद
कार्तिक कृष्ण द्वादशी
जय जय श्री हरिव्यास कुलभूषण
मंगल मूरति नियमानन्द
सेऊँ श्री वृन्दाविपिन बिलास
आज बधायो री हेली श्री भट्देव के
भयो लाल रसिक प्रतिपाल
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक कृद्गणा त्रियोदशी
जाको मन वृन्दा विपिन हरयौ
सहेली सुन सोहिलो
श्री हरिव्यास महाक्षिति मण्डल
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी
प्रिया मुख सुखमा दखि के
प्रिया मुख सुखमा कौ आगार
नगर में सोभा सरस सुहाई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक अमावस्या-दीपावली
वृन्दावन इक सुन्दर जोरी
आज दीवारी की निस नीकी
विलसत आज दीवारी दंपति
आज दीपति दिबि दीपमालिका
पिया पितांबर मुरली जीती
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
जै जै श्री निम्बार्क आचार्य
युगल किच्चोर हमारे ठाकुर
मो मन बसो युगल किशोर
सब मिली गावोरी आज बधाई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल द्वितीया
बलि बलि श्री राधे नंद नंदन
हों बलि जाय हों आनंद
नियमानंद जगत गुरु गाइये
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल तृतीया
नैंक नैंन की कोर मोरि
आज सखी आनंद महल में
बधायो ऋषीराज के
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
बसौ मेरे नैनन में दोउ चंद
बिलसत दोउ लाड़िले
चलो सखी निम्ब ग्राम सुख लहिये
निम्बार्क दीन बन्धु सुन पुकार
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल पंचमी
श्री राधिका आज आनंद में
सहज सजन सुख बिलसहीं
निम्बग्राम में आज बधाई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल षष्ठी
बृज भूमि मोहनी में जानी
चल सखी निम्बग्राम
दृढ़ व्रत निम्ब चन्द पद प्रेम
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल सप्तमी
आज ब्रजजन मिलि मंगल गावें
भादों सुकला अष्टमी आई
आज बधाई है बरसाने
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल अष्टमी
जै जै श्री सोभू देव
नमो नमो जै सोभू देव
गोकुल मंगल आज बधाई
महल में बाजत
सहचरि फूलि अंग न माई
लाल जू के सोहिले
बरष गाँठि मोहन की
बजत बधाई आजु भली री
आज कछु औरें ओप भई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल नवमी
जै जै श्री गोपाल संतहित अवतरे
नमो नमो श्री हंस गोपाल
आज बधाई बजत सुहाई
श्री हंस जू के चरण कमल
जै जै सनकादि उदार
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल दशमी
देव परम धर्मादि पर रुप परमेच्च्वरम
कहा तोसों कहों मो हिय हित की बात
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल एकादशी
(श्री) राधा माधव अद्भुत जोरी
जयति श्रीमत निम्ब आदित्य प्रभु
प्यारी (जू) फूली फूल फूल सों
श्री निम्बार्क दीन बन्धु सुन
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल द्वादशी
नवल बसंत नवल श्री वृन्दावन
बिहरें श्री राधे बन बिहार
जै जै श्री निम्बादित्य आनंद मूल
खेलत बसंत (श्री) हरिव्यास देव
(किसी तिथि के घटने पर, अन्य तिथि को हो सकता है।)
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी
नव में पुंज सखिन के
करुणा सिंधु कृसोदरि
अरुण कुंवर की जन्मगाँठ सुनि
निम्बग्राम में आज बधाई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी
जाको मन वृन्दा विपिन हरयौ
आज अमित मंगल भयो माई
आज बधाई बजत सुहाई
हमें बलि बड़ो यही है पोद्गा
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक पूर्णिमा (बढ़ी तिथि पर)
राजई समाज आज मधुप ज्यों
मेरी प्रानन की आधार
जोरी गोरी सांवरी
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक पूर्णिमा (निम्बार्क जयंती)
दोऊ मिलि करत भांवती बतियां
बजत बधायो री हेली
आज सखी ऋषी राज द्वार पै
(श्री) निम्बार्क निम्बार्क निम्बार्क कहो रे
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक कृष्ण द्वादशी
जय जय श्री हरिव्यास कुलभूषण
मंगल मूरति नियमानन्द
सेऊँ श्री वृन्दाविपिन बिलास
आज बधायो री हेली श्री भट्देव के
भयो लाल रसिक प्रतिपाल
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक कृद्गणा त्रियोदशी
जाको मन वृन्दा विपिन हरयौ
सहेली सुन सोहिलो
श्री हरिव्यास महाक्षिति मण्डल
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी
प्रिया मुख सुखमा दखि के
प्रिया मुख सुखमा कौ आगार
नगर में सोभा सरस सुहाई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
वृन्दावन इक सुन्दर जोरी
आज दीवारी की निस नीकी
विलसत आज दीवारी दंपति
आज दीपति दिबि दीपमालिका
पिया पितांबर मुरली जीती
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
जै जै श्री निम्बार्क आचार्य
युगल किच्चोर हमारे ठाकुर
मो मन बसो युगल किशोर
सब मिली गावोरी आज बधाई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
बलि बलि श्री राधे नंद नंदन
हों बलि जाय हों आनंद
नियमानंद जगत गुरु गाइये
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
नैंक नैंन की कोर मोरि
आज सखी आनंद महल में
बधायो ऋषीराज के
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
बसौ मेरे नैनन में दोउ चंद
बिलसत दोउ लाड़िले
चलो सखी निम्ब ग्राम सुख लहिये
निम्बार्क दीन बन्धु सुन पुकार
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
श्री राधिका आज आनंद में
सहज सजन सुख बिलसहीं
निम्बग्राम में आज बधाई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
बृज भूमि मोहनी में जानी
चल सखी निम्बग्राम
दृढ़ व्रत निम्ब चन्द पद प्रेम
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
आज ब्रजजन मिलि मंगल गावें
भादों सुकला अष्टमी आई
आज बधाई है बरसाने
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
जै जै श्री सोभू देव
नमो नमो जै सोभू देव
गोकुल मंगल आज बधाई
महल में बाजत
सहचरि फूलि अंग न माई
लाल जू के सोहिले
बरष गाँठि मोहन की
बजत बधाई आजु भली री
आज कछु औरें ओप भई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
जै जै श्री गोपाल संतहित अवतरे
नमो नमो श्री हंस गोपाल
आज बधाई बजत सुहाई
श्री हंस जू के चरण कमल
जै जै सनकादि उदार
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
देव परम धर्मादि पर रुप परमेच्च्वरम
कहा तोसों कहों मो हिय हित की बात
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
(श्री) राधा माधव अद्भुत जोरी
जयति श्रीमत निम्ब आदित्य प्रभु
प्यारी (जू) फूली फूल फूल सों
श्री निम्बार्क दीन बन्धु सुन
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
नवल बसंत नवल श्री वृन्दावन
बिहरें श्री राधे बन बिहार
जै जै श्री निम्बादित्य आनंद मूल
खेलत बसंत (श्री) हरिव्यास देव
(किसी तिथि के घटने पर, अन्य तिथि को हो सकता है।)
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
नव में पुंज सखिन के
करुणा सिंधु कृसोदरि
अरुण कुंवर की जन्मगाँठ सुनि
निम्बग्राम में आज बधाई
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
जाको मन वृन्दा विपिन हरयौ
आज अमित मंगल भयो माई
आज बधाई बजत सुहाई
हमें बलि बड़ो यही है पोद्गा
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
राजई समाज आज मधुप ज्यों
मेरी प्रानन की आधार
जोरी गोरी सांवरी
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
दोऊ मिलि करत भांवती बतियां
बजत बधायो री हेली
आज सखी ऋषी राज द्वार पै
(श्री) निम्बार्क निम्बार्क निम्बार्क कहो रे
श्री राधा रमण विराजैं
सेवों श्री राधा रमण उदार
निबार्क कोट की आचार्य परंपरा
निबार्क कोट की आचार्य परंपरा
1. हंस भगवान
2. सनक, सनंदन, सनातन व सनत कुमार
3. नारद भगवान
4. निबार्क भगवान
5. निवासाचार्य
6. विश्वाचार्य
7. पुरुशोत्तामाचार्य
8. विलासाचार्य
9. स्वरूपाचार्य
10. माधवाचार्य
11. बलभद्राचार्य
12. पद्माचार्य
13. श्यामाचार्य
14. गोपालाचार्य
15. कृपाचार्य
16. देवाचार्य
17. सुंदर भट्ट
18. पद्मनाभ भट्ट देवाचार्य
19. उपेंद्र भट्ट देवाचार्य
20. रामचंद्र भट्ट देवाचार्य
21. वामन भट्ट देवाचार्य
22. कृष्णभट्ट देवाचार्य
23. पद्माकर भट्ट देवाचार्य
24. वण भट्ट देवाचार्य
25. भूरि भट्ट देवाचार्य
26. माधव भट्ट देवाचार्य
27. श्याम भट्ट देवाचार्य
28. गोपाल भट्ट देवाचार्य
29. बलभद्र भट्ट देवाचार्य
30. गोपीनाथ भट्ट देवाचार्य
31. केशव भट्ट देवाचार्य
32. गांगल भट्ट देवाचार्य
33. केशव कश्मीरी भट्ट देवाचार्य
34. श्रीभट्ट देवाचार्य
35. हरिव्यास देवाचार्य
36. स्वयंभूराम देवाचार्य
37. कर्णहर देव
38. नारायण देव
39. हरिदेव
40. श्याम देव
41. श्याम दामोदर देव
42. श्रुति देव
43. सहजराम देव
44. रामदेव
45. ज्ञानदेव
46. वृंदावन देव
47. रामशरण देव
48. धर्म देव
49. सेवादास
50. स्वामी गोपालदास
51. स्वामी हंसदास
52. बाल गोविंद दास/हरिदास श्रृंगारी
53. माता श्याम प्यारी
वृन्दावन बिहारी
1. हंस भगवान
2. सनक, सनंदन, सनातन व सनत कुमार
3. नारद भगवान
4. निबार्क भगवान
5. निवासाचार्य
6. विश्वाचार्य
7. पुरुशोत्तामाचार्य
8. विलासाचार्य
9. स्वरूपाचार्य
10. माधवाचार्य
11. बलभद्राचार्य
12. पद्माचार्य
13. श्यामाचार्य
14. गोपालाचार्य
15. कृपाचार्य
16. देवाचार्य
17. सुंदर भट्ट
18. पद्मनाभ भट्ट देवाचार्य
19. उपेंद्र भट्ट देवाचार्य
20. रामचंद्र भट्ट देवाचार्य
21. वामन भट्ट देवाचार्य
22. कृष्णभट्ट देवाचार्य
23. पद्माकर भट्ट देवाचार्य
24. वण भट्ट देवाचार्य
25. भूरि भट्ट देवाचार्य
26. माधव भट्ट देवाचार्य
27. श्याम भट्ट देवाचार्य
28. गोपाल भट्ट देवाचार्य
29. बलभद्र भट्ट देवाचार्य
30. गोपीनाथ भट्ट देवाचार्य
31. केशव भट्ट देवाचार्य
32. गांगल भट्ट देवाचार्य
33. केशव कश्मीरी भट्ट देवाचार्य
34. श्रीभट्ट देवाचार्य
35. हरिव्यास देवाचार्य
36. स्वयंभूराम देवाचार्य
37. कर्णहर देव
38. नारायण देव
39. हरिदेव
40. श्याम देव
41. श्याम दामोदर देव
42. श्रुति देव
43. सहजराम देव
44. रामदेव
45. ज्ञानदेव
46. वृंदावन देव
47. रामशरण देव
48. धर्म देव
49. सेवादास
50. स्वामी गोपालदास
51. स्वामी हंसदास
52. बाल गोविंद दास/हरिदास श्रृंगारी
53. माता श्याम प्यारी
वृन्दावन बिहारी
उत्सव में होने वाली रासलीला
उत्सव में होने वाली लीलाओं का क्रम :-
तिथि लीला
कार्तिक कृष्ण द्वादशी/धनतेरस वंशी चोरी लीला
कार्तिक कृष्ण चौदस केवट लीला
कार्तिक अमावस/दीपावली चौसर लीला
कार्तिक शुल प्रतिपदा मूदरी चोरी लीला
कार्तिक शुल द्वितीया पनघट लीला
कार्तिक शुल तृतीया ब्रह्मचारी लीला
कार्तिक शुल चतुर्थी विदुषी लीला
कार्तिक शुल पंचमी शंकर लीला
कार्तिक शुल छठी पांडे लीला
कार्तिक शुल सप्तमी राधा प्राकटय लीला
कार्तिक शुल अष्टमी/गोपाष्टमी गोचारण लीला
कार्तिक शुल नवमी/अक्षय नवमी जोगन लीला
कार्तिक शुल दशमी श्याम सगाई लीला
कार्तिक शुल एकादशी/देवउठनी एका. वरुण लीला
कार्तिक शुल द्वादशी मान लीला
कार्तिक शुल तृयोदशी गोदनावारी लीला
कार्तिक शुल चर्तुदशी माखन चोरी लीला
कार्तिक पूर्णिमा सहज सुख
अग्रहायण कृष्ण प्रतिपदा शोभायात्रा
अग्रहायण कृष्ण द्वितीया राजदान लीला
* तिथि बढ़ने की स्थिति में चंद खिलौना, मणि खंभ और सुदामा लीला भी आवश्यकता पड़ने पर होती है। अलग-अलग वर्षों में ये तीनों लीलाएं मंदिर में हो चुकी हैं।
तिथि लीला
कार्तिक कृष्ण द्वादशी/धनतेरस वंशी चोरी लीला
कार्तिक कृष्ण चौदस केवट लीला
कार्तिक अमावस/दीपावली चौसर लीला
कार्तिक शुल प्रतिपदा मूदरी चोरी लीला
कार्तिक शुल द्वितीया पनघट लीला
कार्तिक शुल तृतीया ब्रह्मचारी लीला
कार्तिक शुल चतुर्थी विदुषी लीला
कार्तिक शुल पंचमी शंकर लीला
कार्तिक शुल छठी पांडे लीला
कार्तिक शुल सप्तमी राधा प्राकटय लीला
कार्तिक शुल अष्टमी/गोपाष्टमी गोचारण लीला
कार्तिक शुल नवमी/अक्षय नवमी जोगन लीला
कार्तिक शुल दशमी श्याम सगाई लीला
कार्तिक शुल एकादशी/देवउठनी एका. वरुण लीला
कार्तिक शुल द्वादशी मान लीला
कार्तिक शुल तृयोदशी गोदनावारी लीला
कार्तिक शुल चर्तुदशी माखन चोरी लीला
कार्तिक पूर्णिमा सहज सुख
अग्रहायण कृष्ण प्रतिपदा शोभायात्रा
अग्रहायण कृष्ण द्वितीया राजदान लीला
* तिथि बढ़ने की स्थिति में चंद खिलौना, मणि खंभ और सुदामा लीला भी आवश्यकता पड़ने पर होती है। अलग-अलग वर्षों में ये तीनों लीलाएं मंदिर में हो चुकी हैं।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)